पेसा कानून, 1996 (PESA Act, 1996) क्या है? झारखंड में क्यों अब ये चर्चा में आया? The NK Lekh
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प्रस्तावना
PESA Act 1996 क्या है? | पेसा कानून की पूरी जानकारी
PESA Act 1996 भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वशासन (Self Governance) का संवैधानिक अधिकार देना है। यह कानून ग्राम सभा को सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में मान्यता देता है।
PESA Act का पूरा नाम क्या है?
The Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996
इसी को संक्षेप में PESA Act कहा जाता है।
PESA Act 1996 क्यों बनाया गया?
1992 में भारत में 73वां संविधान संशोधन लागू हुआ, जिससे पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई। लेकिन यह व्यवस्था आदिवासी समाज की पारंपरिक शासन प्रणाली के अनुकूल नहीं थी।
- आदिवासी समाज में पहले से ग्राम सभा आधारित निर्णय प्रणाली थी
- जल, जंगल और जमीन पर सामुदायिक अधिकार था
- परंपरागत न्याय व्यवस्था मौजूद थी
इसी अंतर को समाप्त करने के लिए 1996 में PESA Act लाया गया।
PESA Act का संवैधानिक आधार (Schedule V)
PESA Act भारतीय संविधान की पाँचवीं अनुसूची (Schedule V) पर आधारित है।
- आदिवासी क्षेत्रों की पहचान
- राज्यपाल को विशेष अधिकार
- आदिवासियों के हित में अलग कानून बनाने का प्रावधान
इसलिए PESA Act केवल अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में ही लागू होता है।
PESA Act कहाँ लागू होता है?
PESA Act भारत के उन राज्यों में लागू है जहाँ अनुसूचित क्षेत्र घोषित हैं।
- झारखंड
- छत्तीसगढ़
- ओडिशा
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
- राजस्थान
- गुजरात
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
ग्राम सभा : PESA Act की आत्मा
PESA Act में ग्राम सभा को केवल सलाहकार नहीं, बल्कि सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था माना गया है।
ग्राम सभा के प्रमुख अधिकार
- भूमि अधिग्रहण पर सहमति या असहमति देना
- खनन और औद्योगिक परियोजनाओं पर निर्णय
- शराब बिक्री पर नियंत्रण
- लघु वनोपज (Minor Forest Produce) का स्वामित्व
- स्थानीय विवादों का समाधान
- सरकारी योजनाओं की निगरानी
जल–जंगल–जमीन पर अधिकार
जल
ग्राम सभा को जल स्रोतों के संरक्षण और उपयोग का अधिकार है।
जंगल
महुआ, तेंदूपत्ता, साल बीज जैसे लघु वनोपज पर समुदाय का अधिकार।
जमीन
आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित होने से रोकने की शक्ति। साथ ही अवैध खनन पर निगरानी
अगर ग्राम सभा सर्वोच्च है तो प्रस्ताव BDO या DC के पास क्यों जाता है?
ग्राम सभा निर्णय करती है, जबकि BDO और DC केवल प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करते हैं।
यदि कोई अधिकारी ग्राम सभा के निर्णय को नहीं मानता, तो यह PESA Act और संविधान का उल्लंघन माना जाता है।
झारखंड में PESA Act की स्थिति
हालाँकि PESA Act 1996 में बन गया था, लेकिन झारखंड में इसके नियम बहुत देर से लागू किए गए।
- लंबे समय तक कानून कागजों में सीमित रहा
- अब जाके नियमावली बनी और इसे कैबिनेट की मंजूरी मिली (दिसंबर 2025)
PESA Act की प्रमुख चुनौतियाँ
- ग्राम सभा की अनदेखी
- प्रशासनिक हस्तक्षेप
- जागरूकता की कमी
- राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव
PESA Act का महत्व
- आदिवासियों को वास्तविक स्वशासन
- लोकतंत्र की जड़ें मजबूत
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
- विस्थापन पर रोक
निष्कर्ष
PESA Act 1996 केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अधिकार और आत्मनिर्णय का संवैधानिक दस्तावेज़ है।
FAQs
Q. PESA Act कब लागू हुआ?
उत्तर: 1996 में
Q. PESA Act किस क्षेत्र में लागू होता है?
उत्तर: अनुसूचित क्षेत्र (Schedule Area)
Q. PESA Act में सबसे अधिक शक्ति किसके पास है?
उत्तर: ग्राम सभा

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